जातीय चेतना बनाम ‘पंचलाइट’ / डॉ.निम्मी ए.ए.
जातीय चेतना बनाम ‘पंचलाइट’ डॉ . निम्मी ए.ए फणीश्वर नाथ रेणु जी भारतीय जन जीवन के बहुत बड़े कथाकार हैं। काबिलेगौर है कि उन्होंने गँवई अंदाज़ में जो कुछ कहा, वह भारतवर्ष के तमाम गाँवों की कथा बन गयी। रेणु के कथा लेखन का समय नई कहानी आंदोलन का समय था। फ़िलहाल लंबा समय बीत जाने के बावजूद रेणु को आँचलिक कहानीकार के खेमे में डालना नासमझी है। बल्कि कहना चाहिए कि वे नयी कहानी के उन कथाकारों में हैं जो कहानी में अभिजनवाद से पृथक रहकर अपने समय और समाज के खुरदरे यथार्थ को चित्रित करने में माहिर थे। लिहाज़ा अमरकान्त , कमलेश्वर , राजेन्द्र यादव, मोहन राकेश और भीष्म साहनी के साथ उन्हें भी नई कहानी के उन कथाकारों में मान्यता देने की दरकार...