संदेश

Hindique

दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन / डॉ.निम्मी ए.ए.

                                                                                             दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन के प्रारंभिक विकास में दो प्रमुख भक्त-परंपराओं का विशेष योगदान रहा।  - ① आलवार  -  वैष्णव भक्त। ② नयनार/नायनमार - शैव भक्त।  इन दोनों परंपराओं ने दक्षिण भारत में भक्ति को लोकजीवन से जोड़ा और आगे चलकर भारत के व्यापक भक्ति आंदोलन के विकास के लिए आधारभूमि तैयार की। आलवार दक्षिण भारत के प्रमुख वैष्णव भक्त-कवि थे। ‘आलवार’ शब्द तमिल भाषा के ‘आळ’ धातु से संबंधित माना जाता है, जिसका अर्थ है - मग्न - ईश्वर के प्रेम और ध्यान में पूर्णतः डूबा हुआ व्यक्ति । आलवार भक्त भगवान विष्णु के अनन्य उपासक थे। वे विष्णु को भगवान, वासुदेव, नारायण आदि नामों से संबोधित करते थे। इन भक्तों ने दक्षिण भारत में भक्ति की ऐसी भावधारा विकसित की,...

जातीय चेतना बनाम ‘पंचलाइट’ / डॉ.निम्मी ए.ए.

                                                                                                         जातीय चेतना बनाम ‘पंचलाइट’ डॉ . निम्मी ए.ए फणीश्वर नाथ रेणु जी भारतीय जन जीवन के बहुत बड़े कथाकार हैं। काबिलेगौर है कि उन्होंने गँवई अंदाज़ में जो कुछ कहा, वह भारतवर्ष के तमाम गाँवों की कथा बन गयी। रेणु के कथा लेखन का समय नई कहानी आंदोलन का समय था। फ़िलहाल लंबा समय बीत जाने के बावजूद रेणु को आँचलिक कहानीकार के खेमे में डालना नासमझी है। बल्कि कहना चाहिए कि वे नयी कहानी के उन कथाकारों में हैं जो कहानी में अभिजनवाद से पृथक रहकर अपने समय और समाज के खुरदरे यथार्थ को चित्रित करने में माहिर थे। लिहाज़ा अमरकान्त , कमलेश्वर , राजेन्द्र यादव, मोहन राकेश और भीष्म साहनी के साथ उन्हें भी नई कहानी के उन कथाकारों में मान्यता देने की दरकार...