‘नेपथ्य राग’ में स्त्री मानवाधिकार/ डॉ.निम्मी ए.ए.
मानवाधिकार मनुष्य के गरिमापूर्ण , स्वतंत्र और समान जीवन की आधारभूत शर्तें हैं। जीवन , समानता , स्वतंत्रता , शिक्षा , विचार , अभिव्यक्ति और निर्णय जैसे अधिकार किसी भी व्यक्ति की मानवीय गरिमा से जुड़े हैं। स्त्री भी पूर्ण मानव के रूप में इन सभी अधिकारों की समान अधिकारी है। फिर भी सामाजिक , सांस्कृतिक और पारिवारिक संरचनाओं में मौजूद पितृसत्तात्मक मानसिकता ने ऐतिहासिक रूप से स्त्री की स्वतंत्रता और अधिकारों को सीमित किया है। कभी उसे शिक्षा और ज्ञान से दूर रखा गया , कभी उसकी प्रतिभा को पुरुष के अधीन माना गया और कभी परिवार तथा सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर उसकी आवाज़ को नियंत्रित किया गया। मीरा कांत का नाटक ‘ नेपथ्य राग’ ( 2004) इसी व्यापक संदर्भ में स्त्री मानवाधिकारों की दृष्टि से विचारणीय है। नाटक चौथी-पाँचवीं शताब्दी की विदुषी खना और आधुनिक कामकाजी स्त्री मेधा को समान वैचारिक धरातल पर रखकर यह प्रश्न उठाता है कि समय के परिवर्तन के बावजूद स्त्री को अपने मानवीय अधिकारों की पूर्ण स्वीकृति कितनी प्राप्त हुई है। नाटक की शुरु...